Monday, April 6, 2009

शिक्षा में पलीता

कॉलेज के प्रधानाचार्य
आज चिंतित थे ,
दूध वाले किसना से बोले -
तेरा बेटा क्या करता है रे !!!
साब ,
पड़ोसी से झगडा हुआ था ,
आज ही ठाणे से आया है ,
अब , खेत पर ही
पौहों के साथ सो रहेगा ।
अरे !! नहीं ये बात नहीं ।
काम करेगा ?
जी साब ,
परीक्षा का मुआइना करना है ,
सौ रूपया रोज पगार ,
जी साब ,राजी हूँ ,
धोबी का बेटा , मोहन
रज्जाक , रोहित , और शमशेर
सब , परीक्षा केन्द्र में
ड्यूटी निभा रहे हैं ,
शिक्षा पद्ध्यती के पलीते में ,
स्वयम संचालक ही
आग लगा रहे हैं ।
रेनू .....

19 comments:

  1. पहले भी यही हाल था,अब भी तो यही हाल है
    दिल्ली में हर गीदड़ पहने शेर की खाल है
    ब्लॉग जगत पर स्वागत है
    कविता-कथा पर पूरी कविता पढ़ सकती हैं
    अभिनव प्रथम कदम पर बधाई
    अगर कविता या गज़ल में रुचि हो तो मेरे ब्लॉग पर आएं
    http://gazalkbahane.blogspot.com/ कम से कम दो गज़ल [वज्न सहित] हर सप्ताह
    http:/katha-kavita.blogspot.com दो छंद मुक्त कविता हर सप्ताह कभी-कभी लघु-कथा या कथा का छौंक भी मिलेगा
    सस्नेह
    श्यामसखा‘श्याम’

    ReplyDelete
  2. चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है...शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  3. धोबी का बेटा , मोहन
    रज्जाक , रोहित , और शमशेर
    सब , परीक्षा केन्द्र में
    ड्यूटी निभा रहे हैं ,
    शिक्षा पद्ध्यती के पलीते में ,
    स्वयम संचालक ही
    आग लगा रहे हैं ।
    रेनू .....
    बहुत खूब .., आज कल यही सब चल रहा है ,पता नही हमें कब तक सहना पडेगा ye सब ..
    रेनू जी.. आपका स्वागत है , मेरी शुभकामनाये आपके साथ है ,आपसे लाभ ही लाभ है .. संस्कृत में phd जो है आप् ..,मुझे शंस्कृत से बहुत लगाव है .. मक्
    गोलमाल है, सब जगह यही हों रहा है
    सरकार है जो कहती सब ठीक हों रहा है .. ,बड़े दुःख कि बात है ..
    आपके प्रोफाइल में देखा आपको पुराने हिंदी गानों का शौक़ है आप् मेरे म्युझिकल ब्लोग्स जरुर देखियेगा और youtube पर सर्च करें mastkalandr वहां भी मेरे पसंदीदा गाने मैंने अपलोड किये है ,आप् देखिए उम्मीद है आप् पसंद करेंगी ..मक्

    ReplyDelete
  4. किसी ने कहा है कि-

    यही खेल हो रहे थे यही खेल हो रहे हैं।
    मेरा घर जलानेवाले मेरे साथ रो रहे हैं।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    ReplyDelete
  5. सुंदर अति सुंदर लिखते रहिये .......
    आपकी अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा
    htt:\\ paharibaba.blogspost.comm

    ReplyDelete
  6. सचमुच वर्तमान में यही कुछ हो रहा है........

    ReplyDelete
  7. धोबी का बेटा , मोहन
    रज्जाक , रोहित , और शमशेर
    सब , परीक्षा केन्द्र में
    ड्यूटी निभा रहे हैं ,
    शिक्षा पद्ध्यती के पलीते में ,
    स्वयम संचालक ही
    आग लगा रहे हैं ।

    आज तो वाकई ऐसी ही स्थिति है ..............
    सुन्दर व्यंग

    ReplyDelete
  8. khud hi bujhaa rahe hain ghar ke chiraag log,
    afsos iske baad bhi muskura rahe hain log .

    kya khoob likha hai !!! hamaare system ki yahee kaduvi haqeeqat hai .

    ReplyDelete
  9. उजाले को पी अपने को उर्जावान बना
    भटके लोगो को सही रास्ता दीखा
    उदास होकर तुझे जिंदगी को नही जीना
    खुला गगन सबके लिए है , कभी मायूश न होना
    तुम अच्छे हो, खुदा की इस बात को सदा याद रखना....

    ReplyDelete
  10. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    ReplyDelete
  11. Ati Uttam,
    Kabhi yahan bhi aayen
    http://jabhi.blogspot.com

    ReplyDelete
  12. आपका हिंदी ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है... और श्री हनुमान जी की जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं.....

    ReplyDelete
  13. हिन्दी चिटठा जगत में आपका स्वागत है , ऐसे ही अपनी लेखनी से हमें परिचित करते रहें

    धन्यवाद
    मयूर दुबे
    अपनी अपनी डगर

    ReplyDelete
  14. ... प्रसंशनीय रचना ।

    ReplyDelete
  15. "BAHUT KHOOB", "YATHARTH" iske alawa aur kuch nahi.

    ----------------------------------------"VISHAL"

    ReplyDelete
  16. हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका सादर स्वागत है....

    ReplyDelete
  17. Saans jaane bojh kaise jivan ka dhoti rahi
    Nayan bin ashru rahe par zindagi roti rahi.

    Ek mahal ke bistare pe sote rahe kutte billiyaan
    Dhoop me pichwaade ek bachchi choti soti rahi .

    Ek naajuk khwaab ka anzaam kuch easa hua
    Main tadapta raha idhar wo us taraf roti rahi

    Tang aakar Muflisi se khudkushi kar li magar
    Do ghaz qafan ko laash uski baat johati rahi

    Bookh gharibi,laachari ne umar tak peecha kiya
    Mehnat ke rookh par zardian tan pe phati dhoti rahi

    Aaj to us maa ne jaise - taise bachche sulaa diye
    Kal ki fikr par raat bhar daaman bhigoti rahi.

    “Deepak” basher ki khawahishon ka qad itna bad gaya
    Khawahishon ki bheed me kahi zindagi khoti rahi.
    @ Kavi Deepak Sharma
    http://www.kavideepaksharma.co.in
    http://www.shayardeepaksharma.blogspot.com

    ReplyDelete