कॉलेज के प्रधानाचार्य
आज चिंतित थे ,
दूध वाले किसना से बोले -
तेरा बेटा क्या करता है रे !!!
साब ,
पड़ोसी से झगडा हुआ था ,
आज ही ठाणे से आया है ,
अब , खेत पर ही
पौहों के साथ सो रहेगा ।
अरे !! नहीं ये बात नहीं ।
काम करेगा ?
जी साब ,
परीक्षा का मुआइना करना है ,
सौ रूपया रोज पगार ,
जी साब ,राजी हूँ ,
धोबी का बेटा , मोहन
रज्जाक , रोहित , और शमशेर
सब , परीक्षा केन्द्र में
ड्यूटी निभा रहे हैं ,
शिक्षा पद्ध्यती के पलीते में ,
स्वयम संचालक ही
आग लगा रहे हैं ।
रेनू .....
बहुत खूब.
ReplyDeleteपहले भी यही हाल था,अब भी तो यही हाल है
ReplyDeleteदिल्ली में हर गीदड़ पहने शेर की खाल है
ब्लॉग जगत पर स्वागत है
कविता-कथा पर पूरी कविता पढ़ सकती हैं
अभिनव प्रथम कदम पर बधाई
अगर कविता या गज़ल में रुचि हो तो मेरे ब्लॉग पर आएं
http://gazalkbahane.blogspot.com/ कम से कम दो गज़ल [वज्न सहित] हर सप्ताह
http:/katha-kavita.blogspot.com दो छंद मुक्त कविता हर सप्ताह कभी-कभी लघु-कथा या कथा का छौंक भी मिलेगा
सस्नेह
श्यामसखा‘श्याम’
चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है...शुभकामनायें.
ReplyDeleteधोबी का बेटा , मोहन
ReplyDeleteरज्जाक , रोहित , और शमशेर
सब , परीक्षा केन्द्र में
ड्यूटी निभा रहे हैं ,
शिक्षा पद्ध्यती के पलीते में ,
स्वयम संचालक ही
आग लगा रहे हैं ।
रेनू .....
बहुत खूब .., आज कल यही सब चल रहा है ,पता नही हमें कब तक सहना पडेगा ye सब ..
रेनू जी.. आपका स्वागत है , मेरी शुभकामनाये आपके साथ है ,आपसे लाभ ही लाभ है .. संस्कृत में phd जो है आप् ..,मुझे शंस्कृत से बहुत लगाव है .. मक्
गोलमाल है, सब जगह यही हों रहा है
सरकार है जो कहती सब ठीक हों रहा है .. ,बड़े दुःख कि बात है ..
आपके प्रोफाइल में देखा आपको पुराने हिंदी गानों का शौक़ है आप् मेरे म्युझिकल ब्लोग्स जरुर देखियेगा और youtube पर सर्च करें mastkalandr वहां भी मेरे पसंदीदा गाने मैंने अपलोड किये है ,आप् देखिए उम्मीद है आप् पसंद करेंगी ..मक्
किसी ने कहा है कि-
ReplyDeleteयही खेल हो रहे थे यही खेल हो रहे हैं।
मेरा घर जलानेवाले मेरे साथ रो रहे हैं।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
सुंदर अति सुंदर लिखते रहिये .......
ReplyDeleteआपकी अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा
htt:\\ paharibaba.blogspost.comm
सचमुच वर्तमान में यही कुछ हो रहा है........
ReplyDeleteधोबी का बेटा , मोहन
ReplyDeleteरज्जाक , रोहित , और शमशेर
सब , परीक्षा केन्द्र में
ड्यूटी निभा रहे हैं ,
शिक्षा पद्ध्यती के पलीते में ,
स्वयम संचालक ही
आग लगा रहे हैं ।
आज तो वाकई ऐसी ही स्थिति है ..............
सुन्दर व्यंग
Acchi kavita, Swagat.
ReplyDeletekhud hi bujhaa rahe hain ghar ke chiraag log,
ReplyDeleteafsos iske baad bhi muskura rahe hain log .
kya khoob likha hai !!! hamaare system ki yahee kaduvi haqeeqat hai .
उजाले को पी अपने को उर्जावान बना
ReplyDeleteभटके लोगो को सही रास्ता दीखा
उदास होकर तुझे जिंदगी को नही जीना
खुला गगन सबके लिए है , कभी मायूश न होना
तुम अच्छे हो, खुदा की इस बात को सदा याद रखना....
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeleteAti Uttam,
ReplyDeleteKabhi yahan bhi aayen
http://jabhi.blogspot.com
आपका हिंदी ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है... और श्री हनुमान जी की जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं.....
ReplyDeleteहिन्दी चिटठा जगत में आपका स्वागत है , ऐसे ही अपनी लेखनी से हमें परिचित करते रहें
ReplyDeleteधन्यवाद
मयूर दुबे
अपनी अपनी डगर
... प्रसंशनीय रचना ।
ReplyDelete"BAHUT KHOOB", "YATHARTH" iske alawa aur kuch nahi.
ReplyDelete----------------------------------------"VISHAL"
हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका सादर स्वागत है....
ReplyDeleteSaans jaane bojh kaise jivan ka dhoti rahi
ReplyDeleteNayan bin ashru rahe par zindagi roti rahi.
Ek mahal ke bistare pe sote rahe kutte billiyaan
Dhoop me pichwaade ek bachchi choti soti rahi .
Ek naajuk khwaab ka anzaam kuch easa hua
Main tadapta raha idhar wo us taraf roti rahi
Tang aakar Muflisi se khudkushi kar li magar
Do ghaz qafan ko laash uski baat johati rahi
Bookh gharibi,laachari ne umar tak peecha kiya
Mehnat ke rookh par zardian tan pe phati dhoti rahi
Aaj to us maa ne jaise - taise bachche sulaa diye
Kal ki fikr par raat bhar daaman bhigoti rahi.
“Deepak” basher ki khawahishon ka qad itna bad gaya
Khawahishon ki bheed me kahi zindagi khoti rahi.
@ Kavi Deepak Sharma
http://www.kavideepaksharma.co.in
http://www.shayardeepaksharma.blogspot.com